
सरबंस दानी, तेरी अमर कहानी,
तेरे जैसा कोई न होगा, ऐसा बलिदानी।
न्याय और धर्म की राह दिखाई,
खालसा पंथ की ज्योति जगाई।
संत भी तू, सिपाही भी महान,
तेरे चरणों में झुका सारा जहान।
अधर्म के आगे तू कभी न डोला,
सत्य की खातिर सर्वस्व तूने तोला।
शिक्षा पाई तूने अनेक भाषाओं में,
संस्कृति बसाई तूने संस्कारों में।
शास्त्र, दर्शन, ग्रंथों का ज्ञान,
लेखनी से भी तू बना महान।
न किसी से डरना, न डराना किसी को,
यही मूल मंत्र दिया तूने जग को।
त्याग, साहस और मानवता की निशानी,
सरबंस दानी, तेरी अमर कहानी।
सीता सर्वेश त्रिवेदी




