साहित्य

सरबंसदानी की अमर गाथा

सीता सर्वेश त्रिवेदी

सरबंस दानी, तेरी अमर कहानी,
तेरे जैसा कोई न होगा, ऐसा बलिदानी।
न्याय और धर्म की राह दिखाई,
खालसा पंथ की ज्योति जगाई।

संत भी तू, सिपाही भी महान,
तेरे चरणों में झुका सारा जहान।
अधर्म के आगे तू कभी न डोला,
सत्य की खातिर सर्वस्व तूने तोला।

शिक्षा पाई तूने अनेक भाषाओं में,
संस्कृति बसाई तूने संस्कारों में।
शास्त्र, दर्शन, ग्रंथों का ज्ञान,
लेखनी से भी तू बना महान।

न किसी से डरना, न डराना किसी को,
यही मूल मंत्र दिया तूने जग को।
त्याग, साहस और मानवता की निशानी,
सरबंस दानी, तेरी अमर कहानी।
सीता सर्वेश त्रिवेदी

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