
कुछ छूट जायेगी,
कुछ भूल जायेगी।
बीते दिनों की यादें
कुछ रह जायेगी।।
कितने नए बन गए
कितने हो गए पुराने।
कितने हुए अपने
कितने हो गए बेगाने।।
कुछ रह जायेगी
कुछ निकल जायेगी।
बन आंसुओ की दर्द
कुछ बह जायेगी।।
कुछ हो गए जवान
कुछ बूढ़ा भी हो गए,
कितने हुए दुश्मन
कितने मित्र बन गए।
लगी जो चोट दिलों पर
जख्म बन जायेगी।
नई पुरानी साल की
यादें कुछ रह जायेगी।।
राजकीय सम्मानित शिक्षक
मुन्ना प्रसाद (मुरली)
रोहतास बिहार




