साहित्य

अधजल गगरी छलकत जाए – लोकोक्ति

मुकेश कुमार दीक्षित 'शिवांश'

पोता ने दादा से पूछा
मुझको बात बड़ी उलझाती,
सभी लोग ऐसा क्यों कहते
अधजल गगरी छलकत जाती।
ज्ञान पास जिसके कम होता
पर बहुत दिखावा वह करता,
लंबी चौड़ी बातें करके
कान सभी के भरता रहता।
दादा बोले पोते से , तब
बात सभी के मन में आती,
देखो देखो देखो भैया,
अधजल गगरी छलकत जाती।

मुकेश कुमार दीक्षित ‘शिवांश’
चंदौसी
मो०-8433013409
दिनांक – 17-1-2026

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