
करें विनय भोले से मिलकर,
जीवन सबका सुखमय कर दें,
हंसी-खुशी हर पल-पल बीते,
नए साल में प्रेम का वर दे।
करें विनय भोले से ….
शब्द-शब्द बस शहद में डूबें,
और बहे बस प्रेम की गंगा,
दे-दे कर थकते नहीं भोले,
जीवन नहीं खाता हिचकोले।
करें विनय भोले से …
राग-द्वेष और अहं-भाव से,
जीवन सफल नहीं हो सकता,
मानव है बस मानव बन जा,
प्रेम से ही तू सब पा सकता।
करें विनय भोले से …
चढ़े हिमालय जब-जब भोले,
याद उन्हें भक्तों की आई,
भक्तों के जयकारे से फिर,
करुणा भोले में भर आई।
करें विनय भोले से …
नए बरस का बदला पन्ना,
प्रेम प्यार से घट भर दो,
गा-गा कर भोले की महिमा,
धरा स्वर्ग-सी सुंदर कर दो।
करें विनय भोले से ..
(304 वां मनका)
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कार्तिकेय कुमार त्रिपाठी ‘राम’
सी स्पेशल गांधीनगर, इन्दौर




