
(हास्य-व्यंग्य)
झूकना एक ईश्वरीय गुण है, जिस व्यक्ति के अंदर यह कला आ जाती है। वह किसी के गले में माला डालकर अपना मुनाफे का काम करा सकता है। यह गुण आपको शहंशाह बना सकती है। जनता के सामने झुका व्यक्ति देश का बादशाह बन जाता है।
किसी बड़े नेता के सामने झुक जाने से पार्टी का टिकट मिल ही जायेगा। सरकार के सामने झुक गये तो मंत्री का दर्जा मिल ही जायेगा, चाहे सीबीआई क्यों न पीछे पड़ी हो। जो ईश्वर के दरबार में झुक जाता है वह दुनिया के मोह माया से मुक्ति प्राप्त कर लेता है।
यह एक विचित्र तरह की शक्ति होती है। जो जिसके सामने झुकता है। उसके अंदर एक रासायनिक क्रिया बड़ी तेजी से काम करने की ऊर्जा मिलने लगती है और वह उस झुके व्यक्ति का काम बड़े तल्लीनता से कर देता है।
प्रेमिका जब झुकती है तो प्रेमी उसके समस्त खरीदारी का पैसा वहन कर लेता है। विद्यार्थी ज्ञान लेने में झुक जाये तो विद्वता प्राप्त कर लेता है। माता- पिता तथा गुरु के सामने झुक कर रहने वाला संस्कार से युक्त हो जाता है। बादल झुक कर किसानों के फसलों को पानी दे जाते हैं।
पत्नी के सामने झुका रहने वाले व्यक्ति का चरित्र नहीं गिर सकतां है। वृक्ष झुक कर लोगों को फल दे देता है। झुकना लाभकारी तत्व है। विनाश को रोक देता है। मानवता बच जाती है।
जिस देश से युध्द हो रहा है वहां का शासक झुक जायें तो युध्द खत्म हो सकता है। विश्व में एक देश का राजा ऐसा है जो कभी झुकता नही है इसलिए वह बार-बार युध्द किसी न किसी देश से करता रहता है।
झुकने की कला सीखना एक कला है। झुकना किसी कमजोर प्रवृत्ति का लक्षण नहीं है। एक विशाल ह्रदय होने का भाव होता है। सच कहता हूँ जो गर्दन झुक जाता है उसके गर्दन में वर माला भी पड़ जाता है।
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जयचन्द प्रजापति ‘जय’
प्रयागराज



