
शब्दों की लय में बहती एक रसधारा है कविता,
मन के गहरे सागर का निर्जन किनारा है कविता।
भावों की चुप्पी को जब आवाज़ मिलती है,
तब एक मधुर स्वर लहरी बनकर सँवरती है कविता।
कभी बूँद बनकर गिरती है पलकों के कोरों से,
कभी मुस्कान बन खिलती है अधरों के छोरों से।
रूपक, उपमाएँ, रंगीन बिम्बों की छाया में,
कल्पनाओं के आकाश में उड़ती है कविता।
लय और छंद के सुर में बंधकर गाती है,
कभी मुक्त होकर हवाओं संग इठलाती है।
हर शब्द यहाँ चुनकर मोती सा सजाया है,
हर पंक्ति में जीवन का सार समाया है।
ध्वनियों की सरगम से मन को छू जाती है,
अनुप्रास की मिठास से रस बरसाती है।
संक्षिप्त शब्दों में गहरी बात कह जाती,
चुप रहकर भी बहुत कुछ सुना जाती है कविता।
यह सिर्फ़ कविता नहीं, एक एहसास है गहरा,
हर दिल के भीतर छिपा एक मधुर सा चेहरा।
जब मन खुद से मिलकर कुछ कहना चाहता है,
तब चुपके से जन्म लेकर मुस्कुराती है कविता।
स्वरचित मौलिक रचना
सुमन बिष्ट, नोएडा




