
मुस्काती हंस हंस गाती कलियां
पुरवा पंख डुलाई है
उपवन में छाई हरियाली
नील गगन में उड़ते पक्षी
सबके मन में छाई नई उमंग
यूं इठलाए खिलकर फ़ूल गुलाब
चहुं दिशाओं में मंद मंद खुशबू फैलाए
सरसों खेतों में उठी फूल
आमों में उठी झूल बौरे
नए फूल फूले बेलों में
कोयल गाती कुहूं कुहूं भंवरे करते हैं गुंजार
अनोखी छटा अलौकिक आनंद
अब बसंत ऋतु आई है।।
डॉ. अनीता शाही सिंह
असिस्टेंट प्रोफेसर
प्रयागराज



