साहित्य

मत्तगयंद सवैया

डॉ ऋतु अग्रवाल

सुंदर सूरत बालक देख यशोमति आज हुई मतवारी।।
पैंजनिया पग में पहने शिशु गोकुल राह करे उजियारी।।
मोर शिखा सिरमौर सजा सिर मातु निहार रही गिरधारी।
नैन जरा तिरछे कर वेणु रखें अधरों पर नित्य बिहारी।।

काजल की टिकुली नित मोहन मस्तक मातु लगावत जाती।
देख शरारत मोहन की मन ही मन में अपने हरसाती।।
माखन खूब बिलोय रही मनमोहन को भरपेट खिलाती।
बात करे मधुरा रुचिरा जब श्याम यशोमति कंठ लगाती।।

कान उमेठ दिए सखियाँ जब आन विलाप करे महतारी।
लाग-लपेट करो ललना मत बात हिया हम जानत सारी।।
अश्रु बहा मुख को लटका कर खूब निरीह बने बनवारी।
मातु यशोमति भावुक होकर प्रेम भरी तब बाँह पसारी।।

डॉ ऋतु अग्रवाल
मेरठ, उत्तर प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!