
नक़ाब चेहरे से तू ने ये हटाया है।
लगे कि चाँद जमीं पर उतर के आया है।
तुम्हारे चेहरे पे ज़ुल्फ़ें गर बिखर जाएँ,
तो लगता चाँद पे आवारा अब्र छाया है।
ग़ज़ब की छायी है मदहोशियत बहारों में,
कहीं पे तो मेरा महबूब मुस्कुराया है।
है शहर में तेरे हुस्न-ओ-शबाब की चर्चा,
किसी के दिल पे तू ने आज क़हर ढाया है।
मैं अपने वालिदैं को अपना सिर झुकाता हूँ,
उन्होंने हौसला मेरा सदा बढ़ाया है।
चनरेज राम अम्बुज




