
समझो दुनिया एक सराय
आने वाला आता है और जाने वाला जाय..
दुनिया को कहते हैं फानी
फितरत इसकी आनी जानी
दम भर शाख पे बैठा पंछी पल भर में उड़ जाय
समझो….
रंग- रूप का गुमां है कैसा
ना रहे शोहरत ना रहे पैसा
दोनों जहां का वो है मालिक जो तू बोए वो पाय
समझो…
घर है किराए का यह समझ ले
नेक काम कुछ अब भी कर ले
सांसों का यह तार न जाने टूटके कब गिर जाय
समझो…..
आशा बिसारिया चंदौसी




