
झूला झूले जनक दुलारी,
सीता मैया प्यारी-प्यारी।
धरती माँ की कोख से आई,
जग में फैली उजियारी।
जनक राजा गोद बिठाएँ,
लोरी गाएँ, फूल सजाएँ।
स्नेह-सुधा से सिंची बिटिया,
सबके मन को भा जाए।
कोमल काया, पावन मन,
सच की सूरत, धीरज धन।
सेवा, करुणा, शील सिखाए,
सीता है आदर्श वचन।
राम नाम जब होंठों आए,
धर्म-दीप मन में जल जाए।
मर्यादा की मूरत बनकर,
जग को राह दिखाए।
आओ हम भी शीश नवाएँ,
सीता गुण अपनाएँ।
सत्य, प्रेम, करुणा के पथ पर,
जीवन दीप जलाएँ।
दिनेश पाल सिंह दिलकश
जनपद संभल उत्तर प्रदेश



