
रूठा होगा अपना तो तुम उसे मना लेना
इस नये वर्ष कुछ ख़ास नये अहसास जगा लेना।
गए वर्ष की खट्टी-मीठी यादें
याद दिलायेंगी हरदम बरसातें
नित संघर्ष करो बढ़ने की
जो तुमने ख़ुद से की है वादें
खोया है गत वर्ष मित्र तो नये बना लेना,
इस नये वर्ष कुछ ख़ास नये अहसास जगा लेना।
कोहरे की जो गरमाहट है
खुशियों की जैसे आहट है
इस नये वर्ष में मिल जाए
जो कुछ भी तुमको चाहत है
ख़्वाबों को ऊर्जा-उमंग भर गले लगा लेना,
इस नये वर्ष कुछ ख़ास नये अहसास जगा लेना।
दिलों के दर्द भुलाये जाएं
ग़ैरों को भी अपनाये जाएं
नहीं बड़ा या छोटा कोई
मिल नव वर्ष मनाये जाएं
25 को दूर भगा 26 को पास बुला लेना,
इस नये वर्ष कुछ ख़ास नये अहसास जगा लेना।
शेख रहमत अली “बस्तवी”
बस्ती (उ. प्र.)
7317035246



