साहित्य

हिम्मत

पूनम त्रिपाठी

हिम्मत
कोई नाज़ुक कहता है मुझको,
कोई कहता है कमज़ोर हूँ…
मैं मुस्काकर बस ये कहती,
मैं चुप हूँ पर भरपूर हूँ…

मैं आँचल में आग छुपाए,
आँखों में विश्वास लिए…
हर बार गिरकर उठी हूँ मैं,
अपने ही प्रयास लिए…

कोई पूछे डर नहीं लगता,
इस दुनिया की ठोकर से…
मैं कह दूँ—डर तो लगता है,
पर हार नहीं मंज़िल से…

मैं घर भी हूँ, मैं राह भी हूँ,
मैं धूप, मैं बरसात…भी हुँ
मैं चुप रहकर भी कह देती,
अपने मन की हर बात…

मत आँको मुझको शब्दों से,
मैं अर्थों की गहराई हूँ…
मैं सहनशीलता की सीमा नहीं,
मैं शक्ति की परछाई हूँ…

तालियाँ मत देना मुझको,
बस इतना सा काम करो…
जब चुप रहूँ तो सुन लेना,
मेरी ख़ामोशी को नाम करो

पूनम त्रिपाठी
गोरखपुर

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