साहित्य

हिंदी कविता

पंडित मुल्क राज "आकाश"

विस्तार हो रहा मानवता का
दानवता दम तोड़ रही है
गुरुओ संतो के कारण ही
मानवता फल फूल रही है

नहीं जरूरत बारूदो की
नहीं तीर तलवारों की
आज जरूरत है बस केवल
करुणा की उपकारों की
दिलो के बीच पड़ी जो खाई
उल्फत से यह पाट रहा है
विश्व पटल पर ऋषि मुनि
प्रेम रतन धन बांट रहा है

रोते दिलों को आओ हसाए
अपनापन दे गले लगाए

प्यासे कीआओ प्यास बुझाये
उजड़े घरों को फिर बसाए

अमन एकता का पैगाम
आओ घर-घर मिल पहुंचाएं
ब्रह्म ज्ञान लेकर सतगुरु से
परचम सत्य का हम लहराए
सद्कर्मों को खुद कर सतगुरु
पैगाम कर्म का दे रहा है
विश्व पटल पर ऋषि मुनि।
प्रेम रतन धन बांट रहा है

जात मजहब के भाव से हटकर
प्यारा मिशन दिया आपने
कैसे रहना है मिलजुल कर
हमको सिखा दिया आपने
असीम अगोचर अविनाशी को
अंग संग दिखा दिया आपने
विश्व बंधुत्व एकता की राह पर
चलना सिखा दिया आपने
सरहद की दीवार गिराकर
एक धरा को कर रहा है
विश्व पटल पर ऋषि मुनि।
प्रेम रतन धन बांट रहा है

समय के रहते हम न जागे
सारे कर्म अधूरे रहेंगे
कर्म धर्म विज्ञान ज्ञान फिर
कोड़ी के ना भाव रहेंगे
आग से आग बुझाओगे तो
मन शीतल फिर कहां रहेंगे
वेर नफरत घृणा ना छोड़ी
प्यार के भाव कहां रहेंगे
“आकाश” जो मुक्ति चाहो इनसे
सतगुरु मुक्ति बांट रहा है
विश्व पटल पर ऋषि मुनि।
प्रेम रतन धन बांट रहा है

पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश
8010239638

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