
ठोकर खाकर जब जब सच्चाई है रोया
देख ये दृश्य झुठा मक्कार हँसी उड़ाया
क्यूं सत्य जगत में है बेहद परेशान
झुठा के सर पे सज गया गुमान अभिमान
सत्य जगत में पाता है धोखा व अपमान
झुठे का जग में है मान और सम्मान
सत्य अकेला शर्म से है आज मूक मौन
वहीं झूठे का है संसार में भय व खौफ
झुठे के दरवाजे पे लगी है अपार मेला
जबकि सत्य बैठा है अपनी घर पे अकेला
कैसी खेल रच दी प्रभु तुँ ये अजब विधान
कुछ भी ना सौचा आगे पीछे ओ भगवान
सत्य के नाम पर समाज में ना है कोई साथ
झुठे के मस्तक पे सज गई आडम्बर की ताज
सत्य के नाम पर जग है अन्दर से ये शरमाया
जब कि झुठे के साथ साथ जयकारा है लगाया
क्यूं सत्य के माथे पे जग वाले जड़ दिया कलंक
झुठा को बनाया तुमने जग में खौफनाक दवंग
पर याद रखना ओ संसार के जालिम गंवार
एक दिन गुंजेगी जग में सत्य की ही जय जयकार
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार



