स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा
ज्ञान दीप से कर दो उजियारा
प्रेम सौहार्द बसे जन मन में
जग में न रहे कोई बेचारा
स्वागत है —–
चदंन वंदन करते है हम तेरा
मंगलगीत गायें लमटेरा
लोक मंगल की कामनाओं संग
वंदन अभिनन्दन करते हम तेरा
मन का तम मिट जाये जगत से
हाथ थाम एक दूजे को बने सहारा
स्वागत है —–
मनोकामनाएं सब पूरी हों
दिल से दिल की न दूरी हो
सुख समृध्दि अमन बरसे धरा पर
न मायूसी न मजबूरी हो
नफरत को न करे कोई गवारा
स्वागत है ——
नवीन करने की चाहत हो मन मे
विपत आपदा न आये जीवन में
करुणा ,दया, मानवता बरसे
मात पिता गुरू सेवा का भाव हो मन में
स्नेह प्रेम की बहे अविरल धारा
स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा।
सुभाष हेमबाबू ” नादान ”
महोबा



