साहित्य

हिंदी मेरा अभिमान

सुभाष हेमबाबू " नादान "

जय हिंदी जय हिंदुस्तान
यश कीर्ति अभिमान है हिंदी
हिंद देश की शान है हिंदी
हम सबकी हिंदी से ही शान है
हिंदी से है साहित्य अधूरा
साहित्य जगत की प्राण है हिंदी
हिंदी रामायण गीता का ज्ञान
जय हिंदी जय हिंदुस्तान
मनुहारी मनभावन हिंदी
गंगा जल सी पावन हिंदी
चंदन वन सी महके जग में
हिंदी पर है हम सबको गुमान
हिंदी मेरी पहचान
हिंदी मेरा अभिमान
जय हिंदी जय हिंदुस्तान
गांव शहर और गली गली में
आओ हिंदी का परचम फहरायें
ज्ञान प्रचार प्रसार करे हिंदी का
काम काज में हिंदी अपनाये
हिदी से ही बढ़ता,हिंद देश का मान
हिंदी की महिमा का करें गुणगान
हिंदी पर हम करे अभिमान
जय हिंदी जय हिंदुस्तान
आओ गर्व करें हम हिंदी पर
हिंदी अपने देश की भाषा
हिंदी हो राष्ट्र भाषा हमारी
जन जन की है यही अभिलाषा
हिंदी का विश्व में फहराये परचम
हिंदी भाषा हो विश्व में महान
जय हिंदी जय हिंदुस्तान
रंग बिरंगे फूलों की क्यारी
भाषाओं में राजदुलारी
सरल अनुपम मनुहारी है
हिंदी हमको प्यारी है
हिंदी भाषा पर करें अभिमान
जय हिंदी जय हिंदुस्तान।

सुभाष हेमबाबू ” नादान ”
महोबा
स्वरचित ,मौलिक

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