पेंशनर्स को नहीं मिलती पूरी महंगाई राहत, अच्छी बात नहीं, बुरी आदत है सुधार करो!
मदन वर्मा "माणिक"

मध्यप्रदेश सरकार से अहम् सवाल है कि शासन के विभागों के पेंशनर्स – परिवार पेंशनर्स को महंगाई राहत देने में भेदभाव की
आदत क्यों बना ली। क्या, उनका पेट नहीं, क्या, ये बीमार नहीं होते, क्या, समाज की परिवार की जिम्मेदारी नहीं ढोते। जिन्होंने सारा जीवन अपनी जवानी वफादारी, ईमानदारी से कड़ी मेहनत से कार्य करते हुए उनसे संबंधित विभागों, महकमों में लगा दी।
क्या ये वरिष्ठ नागरिक होकर जिल्लत की जिंदगी जीने को मजबूर नहीं हो रहे हैं। क्या, इनकी आवश्यकता की वस्तुएं, सेवाएं निर्धारित दामों से कम रूपयों में मिलती हैं। क्या, इन पर
बढ़ती महंगाई का असर नहीं होता। यदि होता हैं तो फिर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देने में नियमित व पेंशनर्स में भेदभाव क्यों। इसमें जो रूपया बच रहा है, वो रुपया कहां जा रहा है।
इस तरह से यह परिपाटी गलत तरीके को व्यवहार बनाई जा रही हैं। पहली केंद्र की तिथि से महंगाई राहत ना देना और दूसरा
बची अवधि का सारा रूपया, बेवजह बचाके इन लाखों पेंशनर्स, परिवार पेंशनर्स को आर्थिक रूप से कमजोर करना,
ऐसा करने से ये मानसिकतौर पर भी प्रताड़ित होते हैं इस कारण
चिंता करते हैं व परेशानी के कारण असमय दयनीय स्थिति में पहुंचने की स्थिति बन जाती है ऐसे हालातों से जान पर भी बन आती है।
पेंशनर्स को नहीं मिलती पूरी महंगाई राहत, यह अच्छी बात नहीं, बुरी आदत है इसमें सुधार करना निहायत ही जरूरी है।
आखिर पेंशनर्स भी सरकार की जिम्मेदारी है। इनसे रुपए बचाके
क्या करना चाहती है प्रदेश सरकार के मुखिया को इस त्रुटि को अवश्य ठीक दुरूस्त करना होगा। आज जहां चिंता हो रही है लेकिन सरकार सभी ओर बराबर ध्यान दे रही है वह अपने ही बुजुर्ग वरिष्ठ नागरिकों को महंगाई की मार के थपेड़ों को खाने
के लिए नाहक मजबूर कर रही हैं। आज बुजुर्गों के पास कोई विकल्प नहीं, आर्थिक कमजोरी से पेंशनर्स भीतर ही भीतर स्वयं को लूटता – टूटता महसूस करते हैं। बहुत प्रकार की आर्थिक मदद व सहायता योजनाएं प्रदेश भर में माताएं, बहनें, बेटियों के लिए, बुजुर्गों के लिए, युवाओं के लिए, पढ़ने वाले बच्चों के लिए
चलाई जा रही है। प्रदेश के मुखिया से जो सभी का साथ, सभी का विश्वास हासिल करने में जनता के कल्याण को प्राथमिकता दे रहे हैं। ये पेंशनर्स भी पूरी महंगाई राहत निर्धारित किए गए समय से पाने के हकदार हैं कि नहीं। इन्हें पूरी राहत मिलनी चाहिये या नहीं यह बात सरकार अपने अंतर्मन में प्रश्न करके पूछ लें। मध्यप्रदेश में राहत दिये जाने में पेंशनर्स के साथ हो रहा भेदभाव खत्म करना चाहिए, यह सरकार की जिम्मेदारी तय है या नहीं। त्योहार, खर्चे, बीमारियों, जिम्मेदारियों को व सुगम
जीवन जीने का हक, पात्रता बुजुर्ग पेंशनर्स, परिवार पेंशनर्स को
हैं या नहीं जब वे इसी प्रदेश में विपरीत आर्थिक विषमता पूर्ण महंगाई की मार में निरिह हालातों में जीवनव्यापन करने को मजबूर हो रहे हैं।
– मदन वर्मा “माणिक”
इंदौर , मध्यप्रदेश




