
कुछ मीठे कुछ रंग-रँगीले, लेकर ये आभास आ गया।
नया साल ऐसा लगता है, मानो नव मधुमास आ गया।।
बीते कल की पीर भूल कर
सपनों ने पंख पसारे हैं।
आशा के दीप जले मन में,
हर चेहरे पर उजियारे हैं।
टूटे मन को फिर से जोड़ें,
जीवन में विश्वास आ गया।।
कुछ मीठे कुछ रंग-रँगीले,लेकर ये आभास आ गया।
नया साल ऐसा लगता है, मानो नव मधुमास आ गया।।
मेहनत की सौंधी खुशबू से,
राह का श्रृंगार हुआ है।
हर सुबह नव संकल्प लेकर
जीवन फिर से तैयार हुआ है।
हिम्मत ने थामा हाथ हमारा,
मन में उल्लास आ गया।।
कुछ मीठे कुछ रंग-रँगीले, लेकर ये आभास आ गया।
नया साल ऐसा लगता है, मानो नव मधुमास आ गया।।
प्रेम, दया, स्नेह लुटाकर,
मानवता का हम मान बढ़ाएँ।
भेद-भाव की दीवार टूटें,
मिलकर खुशियाँ रोज़ मनाएँ।
नव चेतन की बयार चली ,
जीवन में नव प्रकाश आ गया।।
कुछ मीठे कुछ रंग-रँगीले, लेकर ये आभास आ गया।
नया साल ऐसा लगता है, मानो नव मधुमास आ गया।।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




