साहित्य

क्रोध

मीनाक्षी शर्मा 'मनुश्री'

क्रोध है एक अद्भुत भावना
जो होती आसक्ति से उत्पन्न
भय भी हो सकता है कारण
न रहने दे क्षणभर भी प्रसन्न

लुप्त करे चिंतन की क्षमता
निभाता ये शरीरस्थ शत्रुता
हो जाये तीव्रगति हृदय की
शीघ्र रक्तचाप भी है बढ़ता

जो अभिलाषा न पूरी होती
क्रोध में परिवर्तित हो जाती
रौद्र रस का यें स्थायी भाव
करता ज्ञान का भी अभाव

कमजोर हो प्रतिरक्षा प्रणाली
मस्तिष्क करे एकदम खाली
इससे हानि का नहीं मापदंड
देता विचित्र खतरनाक दंड

नियंत्रण का करें शीघ्र प्रयास
कतरा भी न रखें अपने पास
न रखें कभी किसी से आस
सफल होगा नियंत्रण प्रयास

मीनाक्षी शर्मा ‘मनुश्री’
गाजियाबाद (उ.प्र)

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