
मेरे प्यारे बच्चों
तुम भविष्य हो देश के
तुम गंदे रास्ते पर न जाओ
सिगरेट मत पीना
गुटखा, शराब मत छूना
गालियाँ बकना बंद करो
मां-बाप को भला बुरा मत कहो
टीचर की बात सुनों
छोड़ो बुरे बच्चों का साथ
बाहर आओ गंदे रास्ते से
पढ़ो अच्छी-अच्छी किताबें
मेरे प्यारे बच्चों
अगर दुनिया देखना चाहते हो
अच्छे भाव भरो
करुणा से भरो
सुंदर शब्दों को सीखो
दया, उदारता का भाव भरो
संस्कारों से सजो-धजो
नई-नई खोज करो
नफरत से जीत नहीं सकते
प्रेम की वर्षा करो
पूरे गगन में छा जाओ
द्वीप बनकर उजाला भरो
मेरे प्यारे बच्चों
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जयचन्द प्रजापति “जय’
जैतापुर, हंडिया, प्रयागराज
कविता का भावार्थ
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यह बाल कविता ‘मेरे प्यारे बच्चों’ में कवि जयचंद प्रजापति ‘जय’ बच्चों को देश का भविष्य बताते हुए बुरी आदतों से दूर रहने और अच्छे संस्कार अपनाने की प्रेरणा देते हैं। वे बच्चों को सिगरेट, गुटखा, शराब, गालियाँ और बुरी संगति से बचने, माता-पिता का सम्मान करने तथा शिक्षक की बात मानने की सलाह देते हैं।
अच्छी किताबें पढ़कर, करुणा, दया, उदारता और प्रेम जैसे भावों से भरकर दुनिया को सुंदर बनाने का आह्वान करते हैं। नई खोजें करने, नफरत न फैलाने तथा प्रेम की वर्षा से उजाले की तरह पूरे आकाश में फैल जाने का संदेश देकर कविता समाप्त होती है, जो बच्चों को नैतिक मूल्यों से सजने और देश को उज्ज्वल भविष्य प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करती है।



