
पीत बसंत सोहे तनु, वीणा कर में धार।
ज्ञान दायिनी शारदे कर दो बेड़ा पार।।
ऋतु बसंत आने लगी छाई है हरियाली।
विद्याधन सबको मिले दूर हुए बदहाली।।
सफेद कमल आसन बिछियो, मंद मंद मुस्कान।
विद्या का वरदान दे जग में बढ़े सम्मान।।
पुष्प चढ़ाऊ आपके चरणों में धर शीश।
कल्याण करो मां भारती दो हमको आशीष।।
बसंत संग मृदंग करें फागुन मस्त माह ।
गुणगान शारदे का होय दुख से बेपरवाह।
वीणा की झंकार में गूंज उठा “आकाश”।
अंधकार सब दूर हो फैले ज्ञान प्रकाश।।
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश



