कृतिकार, समरस सृजन एवं जकासा के संयुक्त गोष्ठी सम्पन्न
मुर्गा बाँग न देने पाता , उठ जाती अँधियारे अम्मा । छेड़ रही चकिया पर भैरव, राग बड़े भिनसारे अम्मा । शील, दया,ममता, सनेह के,बाँट रही उजियारे अम्मा । आँगन के तुलसी चौरे पर, आँचल रोज पसारे अम्मा ।- *श्री रामकिशोर दहिया*

श्रीभैरोंसिंह शेखावत सभागार, चैंबर भवन, जयपुर में कृतिकार, समरस सृजन एवं जकासा के संयुक्त तत्वाधान में नववर्ष अभिनन्दन काव्य गोष्ठी का आयोजन श्री गोपीनाथ गोपेश जी की अध्यक्षता में आयोजित हुआ ।
दीप प्रज्वलन के बाद वैद्य भगवान सहाय पारीक ने बृज भाषा में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की । मुख्य अतिथि श्री रामकिशोर दहिया को श्री अशोक कुमार शर्मा जी द्वारा शाल पहनाकर,श्री विनय कुमार अंकुश द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर श्रीमती अर्चना सिंह ‘अना’ द्वारा श्रीफल भेंट कर, विशिष्ठ अतिथि श्री ब्रजेश भट्ट जी का श्री विजय मिश्र दानिश द्वारा माला पहनकर श्री अनिल अनवर की का मृदुला अरुण जी द्वारा सम्मानित किया । गोष्ठी की अध्यक्षता श्री गोपीनाथ गोपेश जी द्वारा की गई । श्री वरुण चतुर्वेदी जी ने माला पहनकर स्वागत किया । समरस के अध्यक्ष श्री लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’ ने मुख्य अतिथि को अपने गीत संग्रह ‘मावस रात उजाली’ की प्रति भेंट की । गोष्ठी का प्रभावी संचालन जकासा के संस्थापक श्री किशोर पारीक ‘किशोर’ द्वारा किया गया ।

श्री अशोक कुमार शर्मा ने मुख्य अतिथि श्री दहिया जी का परिचय प्रस्तुत करते हुए बताया कि श्री रामकिशोर दाहिया नवगीत विधा के सशक्त और प्रतिबद्ध हस्ताक्षर हैं जिनके नवगीतों में समकालीन जीवन की जटिलताएँ, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाएँ अत्यन्त सहज और प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त होती हैं। उनकी लेखनी की प्रमुख विशेषताएँ हैं—
•लोकभाषा का स्वाभाविक प्रयोग।
•गहन अनुभूति और संवेदनात्मक गहराई। •लयात्मकता और चित्रात्मकता । वे लंबे समय से निरंतर साहित्य साधना में संलग्न रहते हुए नवगीत परंपरा को समृद्ध कर रहे हैं। यह आयोजन नवगीत विधा के संवर्धन, साहित्यिक संवाद और रचनात्मक ऊर्जा के आदान-प्रदान की दृष्टि से अत्यन्त उपयोगी सिद्ध हुआ।
*काव्यपाठ एवं नवगीतों की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति*
इस गरिमामयी अवसर पर जयपुर के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने उपस्थित होकर उच्च स्तरीय काव्यपाठ करने वाले में प्रमुख हैं— डॉ.गोपीनाथ गोपेश, वरुण चतुर्वेदी, किशोर पारीक ‘किशोर’ लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’, बृजेश भट्ट, रतन लाल शर्मा रतन, विनय कुमार शर्मा, शिवचंद्र जैन, वैद्य भगवान सहाय पारीक, विजय मिश्र दानिश, डॉ.एन. एल.शर्मा, अनिल अनवर, डॉ.अर्चना सिंह अना, मृदुला अरुण, नवल किशोर शर्मा, रामकिशोर वर्मा, अमर सिंह अमर, सावित्री रायजादा, तेजकरण पाराशर, कन्हैया लाल कान्हा, मनोज कुमार शर्मा एवं अशोक शर्मा कटेठिया। गोष्ठी में उच्च स्तर की छंद रचनाएं, गीत, नवगीत, गजल गीतिका और मुक्तक आदि से सराबोर रचनाओं की खूब सराहा गया ।
सभी कवियों ने अपने काव्यपाठ से कार्यक्रम को ऊर्जावान और भावपूर्ण बना दिया। श्री किशोर पारीक जी ने सभी आगंतुक श्रोताओं और काव्य के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते कहाँ कि यह आयोजन न केवल एक सम्मान समारोह रहा, बल्कि नवगीत विधा के प्रति समर्पित रचनाकारों के लिए प्रेरणास्रोत और साहित्यिक चेतना का सशक्त मंच भी सिद्ध हुआ।


