
14-15 जनवरी के दिन ही,बदलती है ये संक्रांति।
इसलिए सनातन धर्म में,कहें इसे मकर संक्रांति।।
इसदिन सूर्य दक्षिणायन से, उत्तरायण में होता है।
इससे खरमास खत्म हो,शुभ दिन शुरू होता है।।
इसदिन ये सूर्य धनु राशि से, मकर राशि में जाए।
इसीलिए ये पावन पर्व, मकर संक्रांति कहलाए।।
यह पुण्य पर्व पूरे देश, भारत में मनाया जाता है।
मकर संक्रांति नेपाल में भी,तो मनाया जाता है।।
भिन्न-भिन्न प्रान्तों में,इसके अलग-अलग हैं नाम।
कुछ प्रान्तों में है लोहड़ी,कुछ में पोंगल है नाम।।
कुछ में इसे बिहू कहते तो, कुछ में कहें संक्रांति।
कुछ में खिचड़ी कहते हैं,कुछ में मकर संक्रांति।।
कुछेक जगह सुग्गी हब्बा,संक्रांति तिल सकरात।
उत्तरायण माघ मकर मेला,घुघुति पेद्दा साक्रात।।
पांडुगा भोगी खिच्चरी,संक्रामण तिर्मूरी भी कहें।
इस पर्व को निज भाषा,अनुसार सब नाम कहें।।
14 जनवरी बाद सूरज,उत्तर अग्रसर हो जाता है।
कहीं उत्तरायण कहते हैं,सूर्य जो उत्तर जाता है।।
संक्रांति बदलती है तब,मांगलिक कार्य हों शुरू।
अंधकार का ये नाश हो,जो प्रकाश कार्य शुरू।।
धार्मिक अनुष्ठान भी,धर्म कर्म के हर कार्य शुरू।
नए गृह में ये गृह प्रवेश,संस्थान प्रतिष्ठान शुरू।।
धार्मिक मान्यता है,धरा पर देव अवतरित होते।
देव कृपा से आत्मा को,ये मोक्ष भी प्राप्त होते।।
पुराणों में लिखा है,मकर संक्रांति में गंगा स्नान।
पुण्य फल प्राप्त होता है,करें गंगासागर स्नान।।
इसी लिए कहते हैं,वर्ष में होते तीरथ बार-बार।
कोलकाता की धरती का,गंगासागर एक बार।।
पिता-पुत्र में बने न सच,शनि के मन में ग्लानि।
शायद यही कारण है,मौसम में ये होती हानि।।
ऋतु परिवर्तन होता है, तब आते हैं वसंत राज।
सरसो पीत खिली है, तेरे स्वागत में ऋतुराज।।
नए तिल गुड़ चावल,उरद दाल का दे जो दान।
लक्ष्मी अन्नपूर्णा कृपा से,बने रसोई पकवान।।
मकर संक्रांति पर्व की,सबको ही दिली बधाई।
बहुत-बहुत शुभकामनाएँ,बहुत-बहुत बधाई।
ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव*
सेवानिवृत वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी. कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.
(शिक्षक,कवि,लेखक,साहित्यकार,समीक्षक,लघुकथाकार)
इंटरनेशनल ज्वाइंट ट्रेजरर, 2023-2024, ए.सी.आई.
एलायंस क्लब्स इंटरनेशनल/पूर्व आरसी-लायंस क्लब्स इंटरने.
(वरिष्ठ समाजसेवी-प्रांतीय,राष्ट्रीय,अंतरराष्ट्रीय सेवा संगठन)




