साहित्य

मुक्तक

विनीता चौरासिया

तन से बैठे घर पर मन से, कई मंजर हमने घूम लिए ।
नूर की बारिश देख वदन, कई खेत वो बंजर झूम लिए ।
किससे कहना क्या सुनना है, सब मायावी दुनिया है,
कितनी बातें मन में रख,हमने कई खंजर चूम लिये ।

विनीता चौरासिया
शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!