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संजय मृदुल

 

हैलो।
जी हैलो!
कौन, भगवान जी बोल रहे हैं?
हाँ। हम भगवान बोल रहे हैं।
प्रभु, मैं रोहित बोल रहा हूँ। एक बड़े से गड्ढे में अपनी गाड़ी के साथ गिरा हुआ हूँ। बस जान निकलने वाली है। सबको कॉल करके देख लिया कहीं मदद नहीं मिली। आखिरी में सोचा आपको भी पुकार कर देख लूँ।
बताओ मैं क्या कर सकता हूँ तुम्हारे लिए।
भगवान जी। बस जान बचा लीजिए मेरी।
ये मेरा विभाग नहीं है भक्त। यह यमराज का विभाग है। अगर तुम्हारा अंत आ गया है तो मैं भी कुछ नहीं कर सकता।
आप तो सर्व शक्तिमान हैं प्रभु। आपकी बात कोई नहीं टालता, एक बार बात करके देख लीजिए।
तुम्हारी कुंडली देखनी पड़ेगी वत्स। अगर उसमें मृत्यु योग अभी नहीं होगा तो बच जाओगे। कोई न कोई बचा ही लेगा तुम्हें। लेकिन अगर जीवन रेखा की समाप्ति होगी तो इस नश्वर शरीर को त्यागना ही होगा तुम्हें।
लेकिन क्यों भगवान जी? अभी तो अट्ठाइस साल का हूँ। दुनिया नहीं देखी, मां बाप को कोई सुख नहीं दिया। फ़िर क्यों मरना होगा मुझे?
कर्म वत्स। पूर्व जन्म के कर्म के प्रभाव से ऐसा होता है।
अगर पूर्व जन्म में इतने पाप किए थे भगवान तो यह जन्म क्यों दिया। नरक में रखकर सजा दे लेते। मेरे माँ बाप की क्या गलती है।
देखो भक्त। बहुत सारे मिस कॉल दिखाई दे रहे हैं मेरे फोन में। मैं रखता हूँ।
कॉल कट गया है। टू टू की आवाज़ आ रही है। कार डूब चुकी है पानी गले तक आ गया है। ऊपर भीड़ लगी हुई है लोगों के फ़ोन की फ्लैश लाइट चमक रही है। सब वीडियो बना रहे हैं। कुछ की आँख में नमी है। कोई पुलिस को कॉल लगा रहा है कोई फायर ब्रिगेड को। सब वहीं हैं पर कोई कुछ कर नहीं रहा है।
©संजय मृदुल

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