साहित्य

समय की रेत

शशि कांत श्रीवास्तव

यह समय ही तो है
जो ,
सदा फिसलता रहता है
रेत की मानिंद अनवरत
क्या ..,
कभी रुका है किसी के लिए
यह समय ही तो है -जो ,
कभी कुछ कहता नहीं
बस ,आता है ..चला जाता है
बेआवाज …..चुप चाप
बस ,छोड़ जाता है यादें
क्योंकि ,
यह समय ही तो है -जो ,
आओ चलें और थाम लें उसे
अपनी इच्छा शक्ति की मुट्ठी में
और ,करें सदुपयोग उसका
परोपकार और देशहित में
क्योंकि ,
यह समय ही तो है -जो
समय की रेत -भांति
सदा फिसलता रहता है
रेत की मानिंद अनवरत ..||

शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली ,पंजाब

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