
उठता है जो आँखों में समंदर, छोटी बातों से,
रोकना कैसे हैं उसको, बताने, कौन है आता ।
वेदना शूल सी उठती है दिल में, पीर है देती,
भेदने, वेदना की पीर को फिर, कौन है आता ।
मिले विस्तार अनुभव को है, शाला, कौन सी ऐसी,
लगाने चोट पर मरहम, यहाँ फिर, कौन है आता॥
विनीता चौरासिया शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश



