
राहों में कांटे ही काटे बिछा दिए,
दर्द को सहते भी सफर तय किया।
तू भी क्या याद करेगी जिंदगी,?
किस शख्सियत से पंगा है लिया।
दिल दर्द से भरा पर चेहरे पर मुस्कान,
हर हाल में मंजिल को पाना है।
कितनी भी पैरों में बांध दो बेड़ियां,
सफलता के आसमान तक जाना है।
दुनिया के सारे रिश्ते टूट जाए फिर भी,
अपने आत्म सम्मान को गिराना नहीं।
जो सम्मान प्यार के शब्द न बोल पाए,
उसकी खातिर हस्ती को मिटाना नहीं।
दुनिया मतलबी लोगों से भरी पड़ी है,
जब तक काम हो वास्ता रहता है।
जब तुम्हारी जरूरत खत्म हो जाएगी,
फिर अलग से उनका रास्ता रहता है।
तू भी हमेशा याद रखेगी जिंदगी मुझे,
जब तुझसे हर जंग जीत जाऊंगी मैं।
लाख मुसीबतें देकर आजमाना मुझे,
अपने सपनों का रास्ता बनाऊंगी मैं।
सौ, भावना मोहन विधानी
अमरावती महाराष्ट्र।




