
ये कविता हमारे गुरु जी को समर्पित
समय सिंह पुंडीर नाम है, इतिहास जिनकी पहचान,
भूले पन्नों को जोड़े, बोले सच्चा हिंदुस्तान।
रुहेला वीरों की गाथा, शब्दों में ढाल गए,
हम कौन हैं, कहाँ से आए — ये राह दिखा गए।
लोक की पीड़ा समझें, लोक के संग चले,
सेवा को ही पूजा माना, ऊँचे आदर्श पले।
गाँव-गली, मंच-मंदिर में, ज्ञान का दीप जलाया,
सच्चे इतिहास से युवाओं का मस्तक ऊँचा कराया।
कहते हैं वो युवाओं से, सुन लो मेरी बात,
पहले अपनी जड़ पहचानो, तभी बनेगी बात।
इतिहास किताबों में नहीं, रग-रग में बसता है,
जो अपने अतीत को भूले, वो आगे क्या रचता है।
रुहेला इतिहास गर्व है, साहस की पहचान,
पुंडीर जी की राह पकड़, बढ़े समाज महान।
हमारे सहारनपुर की शान समय का रखते है जो हमेशा ध्यान
समय सिंह पुंडीर जी है उनका नाम!
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश




