
उसका ही बिखरा हुआ सब वजूद है,चल बोल!
हमारा होना उसके होने का सबूत है ,चल बोल।
इस कायनात में कुछ बेवज़ह नही लगता,
तेरे होने का आख़िर क्या मक़्सूद हैं,चल बोल।
कामयाबी किस्मत की बस मुहताज़ नहीं,
हौशला चाहिए होता मजबूत है, चल बोल।
नियम कानून से चलती है कायनात पूरी
ये जो विज्ञान है एक सबूत है,चल बोल।
ज़रूर सूरज हर इक रौशनी का वाइज़ है,
तो अंधेरा किसकी करतूत है, चल बोल।
ये जो ईरान है सीरिया ना वेनेजुयेला है,
असलहा इनक भी यमदूत है, चल बोल।
रचना– जय प्रकाश विश्वकर्मा, मुंबई




