
मन चंचल हो जाए रे
मदमाते मधुमास में
इंद्रधनुष छा जाए रे
रंगराते उल्लास में…..
शीत की ठिठुरन बीत चली
जड़ता टूटी संवादों की
अधरों पर खिल-खिल मुस्कानें
रुत आई बहकी बातों की
मन उमंग भर जाए रे
बासंती परिहास में…..
छेड़ रही है पवन सुहानी
गीतों की मधु रागिनी
सर-सर-सर-सर उड़े चुनरिया
लाज भरी है भामिनि
नयन-नयन में बात चली
सूरज के स्वर्ण उजास में…..।
स्वरचित, अप्रकाशित रचना.
मीना जैन
इंदिरापुरम गाजियाबाद।




