साहित्य

सजल : “जनता जाग रही है”

दिनेश पाल सिंह 'दिव्य'

मत समझो ये खामोशी है…
आने वाले तूफ़ान की तैयारी है।
आज जो चुप है यहां पर…
इतिहास लिखने की जिम्मेदारी है…!!

सेवा न बने अगर कुर्सी…
तो बोझ बन जाती है!
जनता जब आँख दिखा दे,
तो सत्ता झुक जाती है!!

मिठास बहुत थी वादों की,
पर सच का स्वाद कहाँ है?
जो कहते थे,साथ है हम,
आज वो साथ कहाँ है?

तालियाँ उनको मिलती हैं
सच की राह, जो चलते हैं!
भीड़ में नारे बाँटें बस जो,
भीड़ में ही वो खो जाते हैं!!

धर्म नहीं अब दीवार बनेगा,
जाति नहीं अब हथियार बनेगी!
पावन धरती यह भारत की
ना नफरत की बाजार बनेगी!!

गवाह रहा है इतिहास सुन लो,
समय सबसे बड़ा बलवान है!
मत तोलो जनता की चुप्पी को
यह सबसे बड़ा तूफ़ान है!!

ऊपर होता है सिंहासन से
जन-जन का सम्मान यहां!
राजधर्म से बढ़कर कुछ नहीं,
यही सच्चा अभियान यहाँ!!

आया है जो सेवा करने ,
सेवा से वो पहचान बनाए!
जो सत्ता को स्वार्थ समझे,
खुद वो अपना मान गिराए!!

सबसे बड़ी किताब है जनता,
हर चेहरा जिसमें दर्ज़ होता है!
देश की सच्ची सेवा करना ही,
एक सच्चे नेता का फ़र्ज होता है!!

झुकेगा एक दिन सिंहासन भी
सत्य का जब जब उद्घोष होगा!
“दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’” कहें ,
जनता ही सर्वोच्च घोष होगा!!

दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’
जनपद संभल उत्तर प्रदेश

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