
भक्ति दिखे चारों तरफ, आए हैं नवरात्र ।
माँ दुर्गा भर जाएँगी, खाली सबके पात्र ।।
दुर्गे काली शारदे, लक्ष्मी धरा पधार ।
भक्तों का उद्धार कर, करना बेड़ा पार ।।
जगमग घर रौशन सजा, कर मैया का ध्यान ।
पलकों का आसान बिछा, माँ का कर आह्वान ।।
पुष्प बिछा चौखट सजा, बांधो बंदनवार ।
मैया मेरी आ गई, होकर सिंह सवार ।।
मातु भवानी दायिनी, सब घर हो धन धान्य ।
सुख संपति काया मिले, करना विनती मान्य ।।
मात महागौरी सुने, भक्तों की अरदास ।
हलुआ पूरी रख सदा, कन्या पूजन खास ।।
भक्तों की सुख दायिनी, माता बड़ी अनूप ।
शिव की हैं अर्धांगिनी, गौर वर्ण है रूप ।।
महिषासुर मर्दन सुनो, दास करे फरियाद ।
खप्पर अरु हलुआ धरे, आरति करते बाद ।।
भाव पुष्प अर्पण करो, भक्ति रखो नैवेद्य ।
ताली की हो आरती, नयन सर्व संवेद्य ।।
माँ चरणों का ध्यान कर, कर लो जय – जय कार ।
खाली झोली भी भरे, दिल से इन्हें पुकार ।।
शुद्ध भाव लेकर सुनो, जो भी आता द्वार ।
भर देती भंडार माँ, जग जननी सरकार ।।
प्रथम शैलपुत्री धरा, आती वृषभ सवार ।
कमल हाथ बाएँ लिए, दाएँ त्रिशूल धार ।।
श्वेत वस्त्र धारण किए, देती भक्ति अपार ।
मातु अभय वरदान दे, भर देती भंडार ।।
ब्रह्मचारिणी भक्त के, संकट हरती मात ।
खुशियों से झोली भरे, देती नवल प्रभात ।।
भक्तों का मंगल करे, हर लेती सब कष्ट ।
सुंदर सौम्य स्वरूप है, और भुजाएँ अष्ट ।।
मातु चंद्रघंटा करे, भक्तों का कल्याण ।
सुंदर शांत स्वरूपिणी, दूर करें सब त्राण ।।
मंगल करती भक्त का, संकट हरती मात ।
रोग शोक सारे हरे, स्वस्थ रखे माँ गात ।।
भजन करें पूजन करें, माँ कूष्मांडा रूप ।
हाथ धनुष अरु बाण है, माता शक्ति अनूप ।।
मालपुआ केला दही, हलवा का हो भोग ।
नीलम की सुन प्रार्थना, हरना माता रोग ।।
पीत वसन में शोभती, भक्त पाखरे पाँव ।
नीलम को माँ रख सदा, अपने आँचल छाँव ।।
स्कंदमातु हृद शांति प्रदा, संतति सुख आधार ।
ममतामयी बुद्धि दात्री है, पद्मासन भुज चार ।।
कृपा करो कात्यायनी, माँ करुणा की खान ।
भक्तों के संकट हरो, कर सुख शांति प्रदान ।।
रक्तबीज के काल का, देव करे आह्वान ।
कालरात्रि के रूप में, प्रगटी शक्ति महान ।।
माता करने चल पड़ी, दुष्टों का संहार ।
अस्त्र शस्त्र है हाथ में, धनुष करे टंकार ।।
देवों की रक्षक बनी, माता शक्ति अनूप ।
शत्रु करे विध्वंस माँ, धर के क्रोधित रूप ।।
कालरात्रि माता हमें, भक्ति करो प्रदान ।
संतति की रक्षा करो, हम बालक अनजान ।।
माता खुश हो दे रही, भक्तों को वरदान ।
रोग शोक का नाश कर, देती साहस ज्ञान ।।
मातु महागौरी सुने, भक्तों की अरदास ।
हलुआ पूरी रख सदा, कन्या पूजन खास ।।
भक्तों की सुख दायिनी, माता बड़ी अनूप ।
शिव की हैं अर्धांगिनी, गौर वर्ण है रूप ।।
जावक यावक चूड़ियाँ, साथ चुनरिया लाल ।
पाँव महावर से सजे, रंगज टीका भाल ।।
सिद्धि दात्रि वरदायिनी, धरकर सुंदर रूप ।
सुख वैभव धन धान्य से, भर देती हैं कूप ।।
श्वेत वस्त्र धारण किए, आकर ऋषभ सवार ।
देकर अभय दान माँ, भर देती भंडार ।।
भक्ति भाव मन में लिए, द्वारे आते लोग ।
बर्फी लड्डू नारियल, भक्त लगाते भोग ।।
हलुआ पूरी अरु चना, भेंट धरे कुछ साथ ।
कन्या को दे प्रेम से , भक्त झुकाते माथ ।।
ब्रह्मा विष्णु भी जपे, सिद्धिदात्री का नाम ।
नवम मातु सब सिद्ध करे, देवों के भी काम ।।
गदा पद्म अरु शंख है, चक्र हाथ में धार ।
दुष्टों का करती दलन, होकर सिंह सवार ।।
भक्तों की रक्षा करो, जग जननी हे मात ।
झोली में खुशियाँ भरो, स्वस्थ रखो मम गात ।।
रत्न कहे मन शांत रख, सोच रखो माँ शुद्ध ।
अंतस प्रेमिल वास हो, चितवन भाव मम प्रबुद्ध ।।
नीलम अग्रवाल रत्न बैंगलोर 🙏




