
चैत्र की आई पावन बेला,
माँ का सजा है आज मेला।
धूप, दीप और फूलों की खुशबू,
हर मन में जागी नई आरजू।
नव शक्ति का संगम प्यारा,
माँ ने जग को दिया सहारा।
शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक,
हर रूप में है प्रेम अपारा।
भक्ति में डूबे हर घर आंगन,
गूँजे माँ का मधुर वंदन।
ढोल, नगाड़े, आरती की धुन,
मिटे हर दुख, हर एक भ्रम।
उपवास, श्रद्धा, मन की शुद्धि,
माँ देती है जीवन में सिद्धि।
आओ मिलकर करें पुकार,
“जय माता दी” बारंबार।
नव आशा का दीप जलाएँ,
मन में प्रेम और विश्वास जगाएँ।
चैत्र नवरात्रि का यह त्यौहार,
भर दे जीवन में सुख अपार।
✍️ लेखनी रंजीता निनामा
झाबुआ, मध्य प्रदेश



