
यह हिंदी तो है
मेरी शान
मेरे प्राण
जो सारी पीड़ा और
दुःख समेट
सर्जन कराए

मुझे सुख सुकून
दे जिंदा रखें हैं
मैं ही क्यों
मेरे जैसे सैकड़ों को
उनके अकेले अपने में
अजीब ऊर्जा और ताकत दे
सुखद अहसास कराती है
संवेदना ओर करुणा का
सहज, सरल हिन्दी
सत् सत् प्रणाम करता हूं
बस इसे तरह
बेसी रहे
देश और दुनिया में
दस्तक दे
बंधन तुझे
सभी हिंदी
रचनाकारों का
सत् सत् वंदन
डॉ रामशंकर चंचल




