
प्रीत की ये रीत लाई, शीत ऋतु जब आई ।
मन में लगन आज, प्रीत की जगाइये ।
बीत रहे रात दिन, अपनों के साथ बिन,
ढूँढ रिश्तों को गिन, गीत कुछ गाइये।
गर ठंड हो प्रचंड, खुद को न दीजै दंड,
खंड-खंड कर दंड,अलाव जलाइए,
साथ-साथ तापें हाथ, गाएं कुछ प्रभु गाथ,
अनाथों के आज आप, नाथ बन जाइए ॥
विनीता चौरासिया शाहजहाँपुर उत्तर प्रदेश




