साहित्य

मुक्तक

डॉ ऋतु अग्रवाल

मुक्तक

सत्य का यह वायदा।
अंत में हो फायदा।।
जीत का सिरमौर हो-
शुभ्र हो यदि कायदा।।१।

मृत्यु तो बदनाम है‌।
प्राण का आयाम है।।
श्वास जब तन छोड़ती-
तो मिले विश्राम है।।२।

दूर जाकर क्या मिला।
पास आकर क्या मिला।।
स्वार्थ के नाते सभी-
आजमाकर क्या मिला।।३।

डॉ ऋतु अग्रवाल
मेरठ, उत्तर प्रदेश

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