साहित्य

अकेलापन

डॉ रामशंकर चंचल

अकेलापन की त्रासदी से अनजान लोगों के लिए

अकेलापन
एक ऐसी त्रासदी है जो
ईश्वर किसी को न दे
अक्सर कुछ लोग
जो जानते है
उनके शब्द मुखर होते हैं
ईश्वर को किसी को
अकेला नहीं छोड़ना चाहिए
दोनों साथ जिए
साथ मरे
ज्यादा अच्छा है यह
यह परम सत्य
वहीं कुछ लोग जानते है
जिसने अकेले आदमी की
हर तरह की पीड़ा और दर्द को
करीब से देखा है
इसलिए अक्सर में
लगा रहता हूं
हौसला बढ़ाने में
जीयो और जीनों दो
हम जैसे भी हैं
अच्छे हैं बस
इतनी सोचे
देखेंगे आप सचमुच लाखों से
अच्छे हैं
जीवन आसान नहीं है
बहुत बहुत मन मार कर
एक दूसरे का
सम्मान करते हुए
जीना पड़ता हैं
दोषी कोई नहीं होता
केवल अपनी अपनी सोच और
जीने के तरीके हैं
जो स्वीकार करते हुए
जिंदगी को हर पल
सुख सुकून से
जीने का पूरा प्रायस करे
वैसे भी कल लभ नहीं होता
आज मिला है जी डाले
यही आज की जिंदगी की
सुखद ओर सुकून देती
परिभाषा है
जीयो और जीनों दो
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश

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