साहित्य

पालन और अनुशासन

अतुल कुमार

हर मात पिता के मन मे
हर पल ये बात है आए
अपने प्यारे बच्चों को
अनुशासन में कैसे लाएं ।

तकनिक का आधुनिक अजूबा
मोबाइल इन्हें दिलवाए
पर फेसबुक और वर्डसएप्प से
कैसे इसे बचाए ।

आवश्यक है यारों
ये बात समझ हम जाए
सबसे पहले बच्चों को
मित्र अपना बनाए ।

उनके जैसी बात करें
जो ऊन्हे पसंद वो खाए
उनके संग में खेलें
यूं उनमे घुलमिल जाए ।

प्रथम भोर में उठ कर
भोर की महिमा सुनाए
जैसा उनसे चाहे
खुद कर के उन्हें दिखलाएं ।

भारत की माटी से
उन्हें जुड़ना हम सिखलाए
वीर शहीदों की गाथाएं
निस दिन उन्हें सुनाए ।

उनके दादा दादी की
सेवा में यूं जुट जाए
मात पिता की आज्ञा का
पालन करना सिखलाए।

खुद भी तो मोबाइल की
दुनिया मे न डूबे जाए
संग में बैठे बच्चों के
कुछ समय तो साथ बिताए।

तकनीकों की अच्छी
बातों को उन्हें बतलाएं
गुलाम बनाए इसको अपना,
न इसके दास बन जाए .

दिन है चौबीस मोती की माला
व्यर्थ न मोती गवाएं ,
उनके जीवन मे यारों
हम यू अनुशासन लाए ।

अतुल कुमार
गड़खल
जिला सोलन ।

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