
अब बस एक ही जतन करें ,पी ओ के की आजादी का।
एक नया इतिहास लिखें हम,दुश्मन की बर्बादी का।।
तीन सौ सत्तर हटा दई,माहौल घाटी का शान्त हुआ।
रास न आया दुश्मन को,मन उसका बहुत क्लान्त हुआ।
जीते जी प्राणान्त हुआ,मोह छूट सका ना वादी का।
एक नया इतिहास लिखें,हम दुश्मन की बर्बादी का।।
आतंकी अड्डा बना हुआ,मिल रहा है साथ पड़ोसी का।
अब की बार जो करी हिमाकत,सर काटेंगे दोषी का।।
करें लहू से तिलक आज,नर मुंडों की शहजादी का
एक नया इतिहास लिखें हम,दुश्मन की बर्बादी का।।
पिछ्ली मार भी भूल गया,फन फिर से नाग तू उठा रहा।
अमन चैन तुझे रास न आता,आतंकी सब बुला रहा।।
मौत की नींद तू सुला रहा,साथी बनता हर वादी का
एक नया इतिहास लिखें हम,दुश्मन की बर्बादी का।।
भारत माता के दामन,पर अब जो भी दाग लगायेगा।
सौगन्ध हमें माँ काली की,वो कभी नहीं बच पायेगा।।
बना उसे फिर हम मेहमाँ दें,मरघट की आबादी का।
एक नया इतिहास लिखें हम,दुश्मन की बर्बादी का।।
जुल्मों सितम तो बहुत सह लिये अब तो प्रतिकार करो।
ओ महलों के सिंहासन जादो! खुला अब यलगार करो।।
थर्राएँ दुश्मन देख जिगर,कैसे बना ये ‘देव’ फौलादी का।
एक नया इतिहास लिखें हम,दुश्मन की बर्बादी का।।
अब बस एक ही जतन करें ,पी ओ के की आजादी।
एक नया इतिहास लिखें हम,दुश्मन की बर्बादी का।।
सुन्दर लाल मेहरानियाँ_राजस्थानी



