साहित्य

रामनवमी

सौ, भावना मोहन विधानी

 

आज हवा भक्ति के सुरों से महक उठी,
पेड़ों पर कोयल खुशी से चहक उठी।
मंदिरों में हो रहे हैं भजन और आरती,
रामनवमी पर कितनी खुश है मां भारती

चैत्र की नवमी आई और खुशियां छाई,
सब दे रहे कैसे एक दूसरे को बधाई।
सबके दिलों में बसते हैं प्रभु श्री राम,
जीवन नैया पार लगाये ये प्यारा नाम।

दशरथ कौशल्या के आंगन का फूल,
माफ कर देते हैं भक्तों की हर भूल।
सत्य प्रेम और वचन का महत्व बताया,
सबके जीवन से गमों को दूर भगाया।

आओ रामनवमी के उत्सव को मनाएं,
जाति भेद भूलकर सबको अपनाएं।
राम जी के गुणों को जीवन में अपनाना,
सच्चे प्यार और श्रद्धा से उत्सव मनाना।

सौ, भावना मोहन विधानी
अमरावती महाराष्ट्र।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!