
जिंदगी
पाबंद है
मेरे उसूलों की
हाथ मिलाइये
प्रसन्नचित्त।
जिंदगी जन्म मृत्यु
जीने की प्रक्रिया
भावनाएं संघर्ष
खुशियां।
जिंदगी
एक पहेली
कभी धूप छांव
रखना संभाल
हमेशा ।
जिंदगी
लुभाती रही
जियो हर पल
चलते रहना
सफर
लगता
जिंदगी सही एक नई पहेली
पन्ना पलटता
कहानी ।
जिंदगी
अनमोल तोहफा
हर पल जीना
खुशी से
हरदम।
स्वरचित
डॉ पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’
प्रयागराज




