साहित्य

सायली (छंद)

डॉ पूर्णिमा पाण्डेय 'पूर्णा'

जिंदगी
पाबंद है
मेरे उसूलों की
हाथ मिलाइये
प्रसन्नचित्त।

जिंदगी जन्म मृत्यु
जीने की प्रक्रिया
भावनाएं संघर्ष
खुशियां।

जिंदगी
एक पहेली
कभी धूप छांव
रखना संभाल
हमेशा ।

जिंदगी
लुभाती रही
जियो हर पल
चलते रहना
सफर

लगता
जिंदगी सही एक नई पहेली
पन्ना पलटता
कहानी ।

जिंदगी
अनमोल तोहफा
हर पल जीना
खुशी से
हरदम।

स्वरचित
डॉ पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’
प्रयागराज

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