
1 मई – मजदूर दिवस पर विशेष
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मजदूरों की किस्मत में है।
बस ! गुड़ , प्याज और रोटी ।।
अपने बच्चों – पत्नी को ।
छोड़ , जाते परदेस को ।।
जी – तोड़ मेहनत करते ।
पहले , तब पाते ‘ कैश ‘ को ।।
खून – पसीने की कमाई ।
फिर भी , सुनते खरी-खोटी ।।
यदि मजदूर नहीं होंगे तो ?
…मजदूर , हाथ बाँध ले तो ?
मत गुमान कर तू इतना कि ,
मजदूर हड़ताल कर दे तो ?
रह जायेंगी धरी की धरी ।
योजनायें मोटी – मोटी ।।
मत कर मजदूर को मजबूर ।
कि होना पड़े , तुमसे दूर ।।
उसकी मज़बूरी को समझ ।
उसकी बातें , मान जरूर ।।
मजदूर दिलाये , बिंदेश्वर ।
देश को सफलता की चोटी ।।
मजदूर , राष्ट्र – निर्माता ।
और है , भविष्य – निर्माता ।।
मजदूर को भी दो , सम्मान ।
वही विश्वकर्मा, अन्नदाता ।।
मजदूर दिवस पर पूरा देश ।
नमन कर रहा है , कोटि-कोटि ।।
– डा. बिन्देश्वर प्रसाद गुप्ता
पटना




