हिंदी साहित्य का इतिहास के अंतर्गत द्विवेदी युग की प्रवृत्तियाँ विषयक ऑनलाइन संगोष्ठी सम्पन्न हुई
डॉ अर्जुन

हिंदी साहित्य का इतिहास के अंतर्गत द्विवेदी युग की प्रवृत्तियाँ विषयक ऑनलाइन संगोष्ठी सम्पन्न हुई
वागीश्वरी काव्य निर्झरिणी, प्रयागराज, उ.प्र. के तत्वावधान में 20 जून 2026, शनिवार को सायं 08:15 बजे से रात्रि 10.15 बजे तक 17वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी (ऑनलाइन) का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इसमें “हिंदी साहित्य का इतिहास (द्विवेदी युग की प्रवृत्तियाँ)” विषय पर विद्वान वक्ताओं ने विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया तथा उपस्थित सभी सुधी साहित्य मनीषियों ने भी अपने विचार रखे। इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न भागों से साहित्यप्रेमियों एवं विद्वानों की सहभागिता रही।
संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष डॉ अर्जुन गुप्ता ‘गुजन’ के निर्देशानुसार आज कि संगोष्ठी का कुशल संचालन आदरणीया श्री ठाकुर द्वारा किया गया। सर्वप्रथम आदरणीया अंकिता जैन अवनी ने अपने सुमधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। उसके बाद संस्था की संरक्षक आदरणीया विनीता निर्झर ने अपने स्वागत उद्बोधन के द्वारा सभी अतिथियों, वक्ताओं, श्रोताओं तथा मंच के संचालक मंडल के सदस्यों का स्वागत किया। संचालक श्री ठाकुर ने आज के विषय पर प्रकाश डालते हुए प्रथम वक्ता आदरणीया प्रिया गुप्ता को आमंत्रित किया। उन्होनें द्विवेदी युग की प्रवृत्तियों के बारे में विस्तारपूर्वक वक्तव्य प्रस्तुत किया। आपने यह भी बताया कि इस युग का नाम द्विवेदी युग क्यों पड़ा। उसके बाद द्वितीय वक्ता आदरणीया स्मिता सिंह ने द्विवेदी युग की विशिष्टताओं पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। आपने बताया कि सन् 1900 से 1920 तक के काल खण्ड को हिन्दी साहित्य के इतिहास में द्विवेदी युग के नाम से जाना जाता है। तत्पश्चात् संस्थापक व अध्यक्ष डॉ. अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’ ने कार्यक्रम का समीक्षात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस युग के प्रणेता आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने हिन्दी गद्य और पद्य में खड़ी बोली हिन्दी को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा व्याकरण को परिमार्जित किया। इस कार्यक्रम की महत्ता तथा उपयोगिता के बारे में आपने विस्तार से बताया। इसके बाद अन्य उपस्थित साहित्य-साधकगण आ. विनीता कँवर, आ. शशि गुप्ता, आ. छाया शाह सख्य, आ. बबीता शुक्ला, आ. ब्रजेश आनंद राय, आ. विशाल मालवीय, आ. इंदु सिंह कंचन इत्यादि ने कार्यक्रम तथा विषय पर अपने विचार रखे।
इसके बाद व्यवस्थापक आदरणीय दुर्गादत्ता मिश्र ‘बाबा’ ने संगोष्ठी में उपस्थित सभी वक्ताओं तथा श्रोताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने सभी वक्ताओं, अतिथियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए डॉ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’ का धन्यवाद किया।
अंत में संस्थापक व अध्यक्ष ने कार्यक्रम की औपचारिक समाप्ति की घोषणा की। इस प्रकार यह ऑनलाइन संगोष्ठी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। प्रत्येक माह में आयोजित यह कार्यक्रम हिंदी साहित्य के इतिहास को जानने की दिशा में बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है।
-डॉ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’
संस्थापक अध्यक्ष-वागीश्वरी काव्य निर्झरिणी, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश




