साहित्य

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस* 

ममता झा मेधा 

को मंदिर मानकर, मन को बना पुजारी।

योग करे जो हर दिवस, कटे रोग बीमारी।।

 

सूरज की पहली किरण संग, आसन जब लग जाए।

सांस-सांस में शक्ति भर, भाग्य नया बन जाए।।

 

भाग-दौड़ की जिंदगी, तनाव रहे भरपूर।

योग की चादर ओढ़ लो, हो जाए सब दूर।।

 

बच्चे-बूढ़े सब करें, योग न कोई छोटा।

रोग-मुक्त जीवन मिले, यही योग का तोहफा।।

 

प्राणायाम से वायु शुद्ध, मन हो जाए शांत।

क्रोध-लोभ सब दूर हों, मिले सुख एकांत।।

 

मोबाइल को छोड़कर, चटाई पर आ जाओ।

योग दिवस के पर्व पर, जीवन नया बनाओ।।

 

ऋषि-मुनियों की थाती यह, भारत की पहचान।

योग से ही विश्व में, बढ़े देश का मान।।

 

एक घंटा योग का, चौबीसों पर भारी।

जो भी इसको अपनाए, उसकी बलिहारी।।

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ममता झा मेधा

डालटेनगंज

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