साहित्य

पिता हमारे जान से प्यारे

शायर देव

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पिता हमारे जान से प्यारे।

फलक के लगते हसीं सितारे।

माँ के कंगन सिन्दूर बने ये,

हसीं आशियाँ के सपने सारे।।

पिता हमारे जान से प्यारे।

फलक के लगते हसीं सितारे।।

 

रूठ कभी गर मैं जाऊँ तो,कितना मुझे मनाते।

यूँ ना रूठों जान मेरी तुम,बार-बार समझाते।।

सीने से मुझे लगाते,तो अश्कों के लगें फिर धारे।

पिता हमारे जान से प्यारे।।

 

ना मिले कोई मुझको हमजोली,संग ये मेरे खेलें।

लुटाके अपनी सारी खुशियाँ,मेरी बलायें लेलें।

दुख-दर्द मेरे सारे झेलें,कष्टों से मुझे उबारें।।

पिता हमारे जान से प्यारे।

 

कभी नहीं करते गुस्सा,बस प्यार सदा बरसाते।

मेहनत मजदूरी कर-कर के,घर को स्वर्ग बानाते।

फिर देख-देख इठलाते,मानो सपने सच होते सारे पिता हमारे जान से प्यारे।

 

पिता हमारे जान से प्यारे।

फलक के लगते हसीं सितारे।।

माँ के कंगन सिन्दूर बने ये,

हसीं आशियाँ के सपने सारे।

पिता हमारे जान से प्यारे।।

फलक के लगते हसीं सितारे।

 

शायर देव मेहरानियाँ राजस्थानी

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