
हमारी प्रार्थना सुन लो, रमा के प्रीत प्रिय प्यारे।
यशोदा नन्द के लाला, मदन मोहन महा न्यारे॥
विनय कर जोड़ है मेरी, पड़ा हूँ द्वार पर तेरे।
उठालो हाथ से प्रभुवर, करूँ विनती सघन घेरे॥
अँधेरे से बचा लो अब, यतन करना प्रभो कोई।
सभी कंटक मिटाओ तुम, पड़े हों राह में जोई॥
नमन स्वीकार कर लो जी, सुसेवक हूँ तुम्हीं स्वामी।
जपूँ निशिदिन तुम्हें भगवन, मिटे हर वासना कामी॥
धरा पर आ न जाओ अब, बढ़े हैं दुष्ट खल पापी।
सुफल सद्कर्म हों सबके, सुपावन भाव हो व्यापी॥
सभी को मार्ग दिखलाओ, सुगीता ज्ञान बतलाओ।
सभी में स्नेह हो भगवन, सहज सन्मार्ग दिखलाओ॥
© डॉ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश




