
कुछ दबी हुई ख्वाहिशें है,
कुछ मंद मुस्कुराहटें,
कुछ खोए हुए सपने है,
कुछ अनसुनी आहटें..
कुछ सुकून भरी यादें हैं,
कुछ दर्द भरे लम्हें हैँ,
कुछ थमें हुए तूफाँ हैं,
कुछ मद्धम सी बरसात..
कुछ अनकहे अल्फाज हैं,
कुछ नासमझ इशारे,
कुछ ऐसे मंझधार हैं,
जिनके मिलते नहीं किनारे..
कुछ उलझनें है राहों में,
कुछ कोशिशें बेहिसाब,
बस यही तो है जिन्दगी,
बस ख्वाहिसे मन मैं लिए
चलते रहिये,
जनाब..!!
***
✍🏼पंकज एस पाण्डेय, शिकोहाबाद




