साहित्य

जीवन के आधार : पिता

दुर्गेश मोहन

पूज्य पिता

जीवन के आधार।

मुझे संवारने में

आप कभी न माने हार।

उन्होंने मुझे संभाल कर

सुन्दर रास्ता दिखाया।

मेरे जीवन निर्माण में

संपूर्ण जिन्दगी बिताया।

वे देखे गरीबी

हौसला न छोड़ा।

परिश्रम के बल पर

सफलता है पाया।

वे मुझे देते आशीष

मैं उन्हें करता नमन।

वे रहेंगे मेरी धरोहर

जन्म दर जन्म।

दुर्गेश मोहन

बिहटा,पटना (बिहार )

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